राखी का त्यौहार

सूना जाए राखी का त्यौहार,
राखी भेजी है, डाक से इस बार
ना भैया मिलें, ना भाभी मिलें,
ना मिले मां पापा का प्यार।
ना भतीजी, भतीजे के मुख पे खुशियां मै देखूं,
ना कर पाऊंगी उनको मैं दुलार।
अनमनी सी हो रही हूं मैं तो,
सूने सूने से होंगे सारे त्यौहार।


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17 Comments

  1. Satish Pandey - July 31, 2020, 12:21 pm

    बहुत खूब, राखी के पावन पर्व से जुड़ी समसामयिक कविता

  2. Geeta kumari - July 31, 2020, 2:24 pm

    बहुत बहुत धन्यवाद जी🙏

  3. मोहन सिंह मानुष - July 31, 2020, 2:40 pm

    सुन्दर प्रस्तुति

  4. Suman Kumari - July 31, 2020, 3:11 pm

    बहुत ही अच्छी

  5. Raju Pandey - July 31, 2020, 3:20 pm

    सुन्दर प्रस्तुति

  6. Geeta kumari - July 31, 2020, 8:20 pm

    सभी भाई बहनों के कष्ट समझने के लिए धन्यवाद 🙏अभिषेक जी
    क्या करें कोरोना काल में ये सब तो सहना ही होगा

  7. Abhishek kumar - July 31, 2020, 8:27 pm

    Is baar Mere bahut Sare bhai bahanon ke sath yahi ho raha hai vah Rakshabandhan per Apne Ghar per Nahin Aata rahe hain na mahamari ke prakop Ke Karan

  8. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - July 31, 2020, 9:47 pm

    सुंदर

  9. Devi Kamla - September 7, 2020, 6:17 pm

    Waah

  10. Piyush Joshi - September 24, 2020, 4:23 pm

    Atisundar

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