राधा- कृष्ण

कृष्ण ने बहुत अटखेलियां की
गोपियों के संग नदियों -तालाबों में,
ना प्यार मिला ऐसा कहीं
जो देखा राधा की आँखों में.

वचन भरे जीवन मरण के
लेकर हाथों को हाथों में,
स्मृतियाँ वो ना कभी भूलेंगी
जो कट गई बातों बातों में.

ना अब रही मिलन की बेला
ना सुगंध रही अर्पित फूलों में,
ना पूरे दोनों एक दूजे के बिन
ना राह मिलन की इन कर्कश शूलों मे.

सदा युगल रहे राधा कृष्ण
साथ ना छूटा सुख दुखो मे,
प्रेम कहानी अमर है उनकी
कही जाएगी युगो -युगो मे.


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9 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - October 21, 2019, 9:52 am

    Nice

  2. Kumari Raushani - October 21, 2019, 11:46 am

    कृष्णा राधे

  3. देवेश साखरे 'देव' - October 21, 2019, 3:12 pm

    सुन्दर रचना

  4. nitu kandera - October 21, 2019, 4:15 pm

    सुन्दर चित्रण

  5. Poonam singh - October 21, 2019, 10:16 pm

    Jai Radhe krishn

  6. Ishwari Ronjhwal - October 22, 2019, 12:54 pm

    Wah

  7. महेश गुप्ता जौनपुरी - October 25, 2019, 5:16 pm

    वाह बहुत सुंदर

  8. Abhishek kumar - November 25, 2019, 12:14 am

    हाँ

  9. Pragya Shukla - February 29, 2020, 11:15 pm

    Good

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