रास्ते तेरे वास्ते

ये पहाड़ ये वादियाँ
ये टेरे मेरे रास्ते

किसऔर जाना है
किस के वास्ते

बस चलते रहना है
खुद की तलाश में

ज़िन्दगी किस और जा रही
उसका पता नहीं

राहगीर है तोह चलते रहना है
बसेरे कई है पर घर नहीं

लोग कई है
पर तेरे जैसा कोई नहीं

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9 Comments

  1. Kanchan Dwivedi - September 9, 2019, 9:15 am

    वाह

  2. राम नरेशपुरवाला - September 9, 2019, 9:18 am

    बहुत खूब

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 4:32 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

  4. Antariksha Saha - September 9, 2019, 5:41 pm

    आप सब का शुक्रिया

  5. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 6:41 pm

    वाह बहुत सुंदर

  6. Kanchan Dwivedi - September 9, 2019, 7:08 pm

    बसेरे तो हैं कई पर कोई घर अपना नहीं है…. सही कहा।

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