रिवायत

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अज़ब दुनिया गज़ब ज़माना है।
ज़ख्म खा कर भी मुस्कुराना है।।

आँधी में टूट कर जो बिखरे हैं।
उन घरोंदों को फिर सजाना है।।

क़ब्ल में दफ़्न कर दिया जिसको।
फिर उस उम्मीद को जगाना है।।

रिश्ते जो जाने क्यूँ बिखर से गए।
बिगडे रिश्तों को फिर बनाना है।।

अज़ब दुनिया गज़ब ज़माना है।
ज़ख्म खा कर भी मुस्कुराना है।।
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@deovrat 02.10.2019
क़ब्ल=पहले से

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13 Comments

  1. Kumari Raushani - October 21, 2019, 11:45 am

    Wah

  2. NIMISHA SINGHAL - October 21, 2019, 12:20 pm

    🙏🙏🌺🌺

  3. देवेश साखरे 'देव' - October 21, 2019, 3:09 pm

    वाह बहुत खूब

  4. nitu kandera - October 21, 2019, 4:14 pm

    Wah

  5. Deovrat Sharma - October 21, 2019, 5:53 pm

    जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया

  6. Poonam singh - October 21, 2019, 10:20 pm

    Good

  7. महेश गुप्ता जौनपुरी - October 25, 2019, 5:16 pm

    वाह जी वाह

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