रिश्ता

बढ़ती रात के साथ रजनीगन्धा महकता है
बिन लिबास की खुशबू से सारा समा बहकता है।
आज जो तू ने बिताए खिलखिलाते पल,
वो आकर तुझे ज़रूर हँसाएँगे कल।
दुनिया की परवाह में अपना वक्त जा़या न करना;
लोग क्या कहेंगे इस ख़याल से आँखें न भरना।
कौन कहता है बादलों में छुपा चाँद खूबसूरत नहीं?
सच मान हर रिश्ते को नाम की ज़रूरत नहीं!


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7 Comments

  1. Poonam singh - August 25, 2019, 6:06 pm

    Good one

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 11, 2019, 11:46 am

    वाह बहुत सुंदर

  3. देवेश साखरे 'देव' - September 17, 2019, 11:27 pm

    सुंदर रचना

  4. Abhilasha Shrivastava - September 18, 2019, 4:13 am

    धन्यवाद

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