रुख़्सत कुछ इस तरह हो गए

रुख़्सत कुछ इस तरह हो गए
वो जिंदगी से मेरी,

मानो बिन मौसम की बरसात
झट से गिरकर तेज़ धूप सी खिला जाती हो,

कम्बख़त मुझे थोड़ा तो भींग लेने देते
कुछ देर उसके जाने के बाद
उसके होने का एहसास तो कर लेता।।

-मनीष


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

amature writer,thinker,listener,speaker.

5 Comments

  1. Antariksha Saha - September 4, 2018, 7:51 pm

    Very good

  2. ज्योति कुमार - September 6, 2018, 1:31 am

    Super

  3. राही अंजाना - September 9, 2018, 12:44 pm

    Waah

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - October 31, 2019, 7:06 pm

    वाह बहुत सुंदर

Leave a Reply