रूपरेखा

ख़ुद पर ऐतवार कर पर भूलकर भी न किसी पर
विश्वास कर।
खुद के ही बल पर अपने जीवन की रूपरेखा तराश कर।।
कब कोई अपना,अपनी अंगुली को घुमा,तोहमत तुझपे लगा देगा
तेरी हर जायज़ कोशिश को भी, तेरी ही गलती बना देगा
अकेले ही रहने की आदत डाल, न अपनी भावनाओं से खिलवाड़ कर।।
देखो कैसी अजब घङी यह आई है,
अपनों से ही अपनेपन की लङाई है,
न स्वार्थ है फिर भी क्यूं ये खिंचाई है
मन है सूना- सूना, पलकें मेरी पथराई हैं
ख्वाइशो को आग लगी,‌कैसे क्यूं किस पर गुमान कर।।


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7 Comments

  1. Geeta kumari - February 24, 2021, 9:39 pm

    जीवन की कड़वी सच्चाईयों को बयान करती हुई हृदय स्पर्शी रचना

  2. Rajeev Ranjan - February 25, 2021, 4:59 am

    जिद है अपनी अपनी सबकी
    कुछ को है अभिमान
    कुछ आदत के गुलाम
    फिर भी सब हैं सही
    सब का मालिक वहीं
    यही समझ कर सकी
    सभी को आदर देना है
    सब उसका ही खिलौना है

  3. Rajeev Ranjan - February 25, 2021, 5:01 am

    नर हो न निराश करो मन को
    निज को समझो न औरों को

  4. Rajeev Ranjan - February 25, 2021, 5:02 am

    बहुत सुंदर

  5. Rakesh Saxena - February 25, 2021, 6:26 am

    बहुत खूब

  6. Satish Pandey - March 1, 2021, 12:01 am

    देखो कैसी अजब घङी यह आई है,
    अपनों से ही अपनेपन की लङाई है,
    न स्वार्थ है फिर भी क्यूं ये खिंचाई है
    मन है सूना- सूना, पलकें मेरी पथराई हैं
    —– बहुत सुंदर रचना। बहुत सुंदर भाव। मन के कोमल भावों की सहज अभिव्यक्ति

  7. Pragya Shukla - March 8, 2021, 1:47 pm

    ख़ुद पर ऐतवार कर पर भूलकर भी न किसी पर
    विश्वास कर।
    खुद के ही बल पर अपने जीवन की रूपरेखा तराश कर।।
    कब कोई अपना,अपनी अंगुली को घुमा,तोहमत तुझपे लगा देगा
    Uttam

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