लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है

लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है

जिंदगी की सुंदर प्लास्टिक, कचरें में बदल जाती है
अगर यूज न हो ढंग से, ऐसे ही जल जाती है

कभी कभी जिंदगी से बढी मौत हो जाती है
जिंदगी कभी कभी पानी में भी जल जाती है|

कुछ को तो कचरे फैलाने से फ़ुरसत नहीं
कुछ की तो जिंदगी कचरें में गुजर जाती है|

फैलती हुई दुनिया में, जिंदगी कहीं सिमटी सी है
लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है|


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7 Comments

  1. राही अंजाना - January 18, 2017, 10:00 pm

    Waah

  2. देव कुमार - January 19, 2017, 11:12 am

    Nice

  3. Panna - January 2, 2018, 9:15 pm

    Nice

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 6:49 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

  5. Abhishek kumar - November 25, 2019, 5:22 pm

    Awesome

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