लगी है आग जंगल मे

लगी है आग जंगल में
न जाने कौन है ऐसा
रगड़ माचिस की तीली को
जला कर चल दिया घर को।
इधर घर जल रहे लाखों
विकल हैं भस्म हैं प्राणी
उधर है मौज में लेटा
धुँवा महसूस करता है।
नहीं भू पर था बरसा जल
हलक सूखे थे जीवों के
लगाये टकटकी थे वे
निरन्तर नभ के मेघों पर।
इधर जल की जगह बरसी
मुसीबत आग बन उन पर
सभी कुछ भस्म कर डाला
किसी दानव की तीली ने।
ओस की बूंद पीकर वे
बचाये थे स्वयं साँसें
लगाकर आग मानव ने
जला संसार डाला सब।
अधजले सोचते हैं कुछ
बिगाड़ा था क्या हमने जो
लिया इंसान ने बदला,
किया आखिर था हमने क्या।

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

कोरोनवायरस -२०१९” -२

कोरोनवायरस -२०१९” -२ —————————- कोरोनावायरस एक संक्रामक बीमारी है| इसके इलाज की खोज में अभी संपूर्ण देश के वैज्ञानिक खोज में लगे हैं | बीमारी…

Responses

  1. जला संसार डाला सब।
    अधजले सोचते हैं कुछ
    बिगाड़ा था क्या हमने जो
    लिया इंसान ने बदला,
    किया आखिर था हमने क्या।
    ___________ बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति प्रस्तुत करते हुए कवि सतीश जी एक हृदय स्पर्शी रचना

  2. जला संसार डाला सब।
    अधजले सोचते हैं कुछ
    बिगाड़ा था क्या हमने जो
    लिया इंसान ने बदला,
    किया आखिर था हमने क्या।
    ___________ बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति प्रस्तुत करते हुए कवि सतीश जी एक हृदय स्पर्शी रचना, उम्दा लेखन

New Report

Close