लेखनी को विराम दे देंगे

दूसरों पर निशाना साधना
हमने कब का बंद कर दिया
तब नादान थे, ना समझ थे
बेअक्ल थे, जिद्दी थे, बेचैन थे
अब सुधर गये हैं
पहले से कुछ बदल गए हैं
ना राज की जरूरत है
ना पाट की जरूरत है
ना किसी कुर्सी की
बस जुनून है
लिखते जाने का और
अपनी जिंदगी की एक
बेहतर रचना लिख जाने का
जिसे पढ़कर लोग याद रखें
जिस दिन ऐसी रचना
हमने लिख ली
हम अपनी लेखनी को विराम दे देंगे।।

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

  1. लेखनी को विराम देने की आवश्यकता नहीं है,
    मिलती हमें सुंदर समीक्षा,और मिलती आलोचना भी यहीं है।

  2. बहुत बहुत सुंदर रचना प्रज्ञा जी आपकी कविता पढ़ कर के मैं निशब्द हो गया हूं अत्यंत सुंदर भाव समेटे हुए रचनाकार को यह प्रेरित करता है की नित उत्तम चीजें लिखिए जिसे देश समाज पढ़ें और अपना उत्थान करें

New Report

Close