वक्त्त

सावधान करती हूं कवियों को
ना लेना पड़ जाए लिखने से जोग
हवा झूठ की चल पड़ी है
सच्चे शब्दों से रुठे हैं लोग.

कितना समझा लोगे तुम उनको
जमाना बहुत ही संगदिल है
जिस तरह गीले कागज पर
शब्दों का लिख पाना मुश्किल है.

सच्चा साथ निभा कर
दुआएं बहुत सी ले आना
धन दौलत कमा कर क्या करोगे
मुश्किल है इसको ऊपर ले जाना.

झूठ का चाहे कितना भी चढ़े फितूर
सच की राह पर चलना हुजूर
वक्त तो रेत की तरह फिसलता रहता है
एक दिन वक्त भी बदलेगा जरूर.


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19 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 15, 2019, 9:45 am

    अच्छा है

  2. D.K jake gamer - November 15, 2019, 11:20 am

    Wow

  3. राम नरेशपुरवाला - November 15, 2019, 11:23 am

    Very nice

  4. Poonam singh - November 15, 2019, 2:42 pm

    Good

  5. nitu kandera - November 15, 2019, 5:21 pm

    thanks

  6. Sudesh Ronjhwal - November 15, 2019, 8:44 pm

    nice

  7. Ashmita Sinha - November 16, 2019, 12:16 am

    Nice

  8. NIMISHA SINGHAL - November 16, 2019, 12:50 am

    Sahi kha

  9. Abhishek kumar - November 23, 2019, 10:35 pm

    सच है

  10. Pragya Shukla - December 10, 2019, 11:14 am

    वाह

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