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यादें

बेवजह, बेसबब सी खुशी जाने क्यों थीं? चुपके से यादें मेरे दिल में समायीं थीं, अकेले नहीं, काफ़िला संग लाईं थीं, मेरे साथ दोस्ती निभाने…

Responses

  1. कोई ठहरता नहीं यूँ तो वक़्त के आगे
    मगर वो ज़ख़्म कि जिस का निशाँ नहीं जाता

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