वरदान

क्यों मांगते हो वरदान परिस्थितिया सदा अनुकूल हो
चलना हमारा काम है गली में कांटे हो या फूल हों

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चारो दिशाओं में छाया इतना कुहा सा क्यों है यहाँ जर्रे जर्रे में बिखरा इतना धुआँ सा क्यों है शहर के चप्पे चप्पे पर तैनात…

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कविता -मुझे वरदान दो —————————- वरदान दो वरदान दो मुझे वरदान दो, उठी है जो लहर मुझ में हो विकट रूप जैसा गति तेज सुनामी…

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