वहम

सोचता था हक़ से मांग सकता हू तुझसे कुछ भी
देखा तोह वोह हक़ तूने कब किसी और को दे दिया

जिस नाम को तबीर बना के घूमते थे
वोह हर किसी के साथ जुड़ गया

गम नहीं है तेरे बेवफाई का
बस खुद के भरोसे से भरोसा उठ गया

जिस्म से तेरे सिर्फ प्यार नहीं था
जो था वोह तू नहीं जान सकती कभी

खोया मैंने जो कभी मेरा ना था
खोया तूने जो सिर्फ तेरा ही था


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3 Comments

  1. Geeta kumari - February 11, 2021, 9:46 pm

    सुन्दर पंक्तियां

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 12, 2021, 10:32 am

    बहुत खूब

  3. Rakesh Saxena - February 12, 2021, 3:28 pm

    Nice

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