वाणी में मिठास

वाणी में मधुरता हो,
बैरी भी अपने बन जाए,
मुख से निकले व्यंग्य बाण,
हृदय में नासूर बनाएं,
ह्रदय के नासूर में,
मीठी वाणी का मरहम लगाएं,
अपने हो या बेगाने,
सभी से अपनत्व पाएं।।🥰🥰

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

वाणी

मानव का गहना है वाणी, वाणी का भोगी है प्राणी । मधुर वचन है मीठी खीर, कटु वचन है चुभता तीर । सद वचन है…

Responses

  1. वाणी में मधुरता रखने की बात कहती अमिता जी की बहुत ही उत्कृष्ट रचना

New Report

Close