वापसी का रास्ता

वो पुरानी गिटार पुरानी बाइक
वो गली वो नुक्कर वो चौबारे
वो बेहतर ज़िन्दगी बनाने के सपने

कोई छीन नहीं सकता वोह जज़्बा आगे आने का
वो खुली आँखों के सपने
वो रात के तारे गिनने के दिन

आज अपार्टमेंट थोड़ा बड़ा ही है
दिल छोटे कमरे बड़े ही है
आज हम बड़े है

कमाया इज़्ज़त नहीं पैसे बहुत
भूख क्या है भूल चुके है हम
याद नहीं कब फॅमिली के साथ खाना खाया

इस कॉपरेट दुनिया मे वैसे पार्टी करने के बहुत फ्रेंड्स है
कोई नहीं जो मेरे खामियों के साथ मुझे एक्सेप्ट करें
झूठे इस शहर मे कोई नहीं जो अपना है

वापस जाना है उस गाओं मे मेरे
थोड़ा कम मे जीना है
रास्ते वही है क्या,चकराव्यूह तोर सकते है क्या
क्या हम इस पराधीनता की बेरियों को छोड़ वापस जा सकते है क्या


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5 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 13, 2021, 12:13 pm

    अतिसुंदर भाव

  2. Rishi Kumar - January 13, 2021, 5:26 pm

    सुन्दर रचना

  3. Antariksha Saha - January 13, 2021, 6:09 pm

    धन्यवाद सर

  4. Antariksha Saha - January 14, 2021, 2:06 pm

    ध्न्यावाद

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