वृक्ष

वृक्ष है तो जीवन है,
पावन वायु, सुरभित है

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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अंतर

है कैसी अंतर पुल कन, जिससे में पुलकित हूँ है घनघोर पतझड़, फिर भी में सुरभित हूँ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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