वो ज्वार है इश्क

मर के भी ना खत्म हो
वो जुनून है इश्क
जी कर जो अधूरी रह जाए
वो कहानी है इश्क
तेरे-मेरे दर्मियां जो
रिश्ता है
उसका नामोनिशान है इश्क
बीच की खिड़की खोलकर
जो बातें होती हैं
उन बातों का बहाना है इश्क
रब होगा पर देखा नहीं
मेरे लिए तो मेरा भगवान है इश्क
नजरों से नजरें टकराने पर
जो होता है
वो एहसास है इश्क
मेरे होंठों ने जो ना कहा
मेरे कानों ने जो ना सुना
वो अल्फाज है इश्क
तेरे सामने आते ही जो मचती है
हलचल दिल में
वो ज्वार है इश्क
तेरे स्पर्श से जो रोंम-रोम
पुष्पित हो उठता है
उस बसंत की बहार है इश्क..

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