वो मुकाम पाऊँ

वो मुकाम पाऊँ!
बस एक ही तमन्ना है जीतेजी ही नहीं
मरके भी सबो के काम आऊं
सारी खुबिया हो मुझमें
पसंद बनू हर मन की वो मुकाम पाऊँ !
दिया तो बहुत कुछ है, अब और क्या मान्गू
सहेजना आया ही नहीं,तुझे इसमें क्यू सानू
बस अरज है इतनी, जो है उसे संभाल पाऊँ
पसंद बनू सबकी—————!
थक गयी हूँ बहुत खुद को सुलझाने में
कसर कहाँ रखी बाकी मुझे उलझाने में
हर उलझनों को खुद से ही सुलझा पाऊँ
पसंद बनू सबकी वो———–!
तेरे करम पे विश्वास कम हो ना पाए
हर वक्त काम मेंरे तेरी ही रहम आए
फ़ितरत हो ऐसी,दूर तुझसे जा ना पाऊँ
पसंद—————————!
सुमन आर्या


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11 Comments

  1. Satish Pandey - August 10, 2020, 7:26 am

    अतिसुन्दर

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 10, 2020, 7:46 am

    Sunder

  3. मोहन सिंह मानुष - August 10, 2020, 8:10 am

    बेहतरीन प्रस्तुति
    मैडम पंक्तियों को पूरा लिखा करो ताकि पढ़ते समय तुक बनी रहे

  4. vivek singhal - August 10, 2020, 9:35 am

    Great

  5. Geeta kumari - August 10, 2020, 10:53 am

    बहुत सुंदर रचना

  6. Ritika bansal - August 10, 2020, 1:34 pm

    सुन्दर

  7. प्रतिमा चौधरी - September 25, 2020, 5:38 pm

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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