वो मेरी स्नेह की पुड़िया

वो जब भी सामने रहती है
सब गम भूल जाता हूँ,
नहीं कुछ याद रखता हूँ
स्वयं को भूल जाता हूँ।
खुशी का गीत है वह
प्रेम का संगीत है वह ही
उसी के सामने लिख कर
उसी को ही सुनाता हूँ।
न चेहरे पर उदासी एक पल
उसके रहे ऐसा,
हमेशा यत्न करता हूँ
चुहल करके हंसाता हूँ।
अगर मन में कभी मेरे
थकावट हो जरा सी भी,
वो तत्क्षण भांप लेती है
मुझे उत्साह देती है।
बताता हूँ वो ऐसी कौन है
जो पूर्ण अपनी है,
वो मेरी स्नेह की पुड़िया
वो मेरी धर्मपत्नी है।
———– डॉ0 सतीश पाण्डेय


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7 Comments

  1. Piyush Joshi - October 20, 2020, 5:50 pm

    वाह कमाल है सर, बहुत खूब

  2. Vasundra singh - October 20, 2020, 5:55 pm

    बहुत खूब

  3. MS Lohaghat - October 20, 2020, 6:13 pm

    बहुत ही बढ़िया

  4. Geeta kumari - October 20, 2020, 6:55 pm

    कवि सतीश जी की उनके जीवन साथी पर बहुत ही सुन्दर रचना ।
    बहुत ख़ूब, लाजवाब

  5. Harish Joshi U.K - October 20, 2020, 6:59 pm

    बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति महोदय

  6. Harish Joshi - October 20, 2020, 7:14 pm

    वाह क्या बात है। बहुत सुंदर कविता।👍👍

  7. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 20, 2020, 11:23 pm

    अतिसुंदर

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