वो सड़क का बेटा

वो तरस रहा था माँ की ममता
बाबा के दुलार को_

मगर तकदीर में अनाथ होना था
सड़क उसकी बिछौना था_

पल-पल हर शख्स में उसने ढूँढा था
वही एक तो उसका सपना था_

कई रातों की लोरी अंतहीन दुलार
पर तकदीर में रिश्तों की टोकरी खाली थी_

वो तन्हा ही ज़िन्दगी का सफर काट रहा था_

आँसू बो रहा था दिल में
दर्द की फसल काँट रहा था_

मिला नहीं जो उसे प्यार
वो सबको बाँट रहा था_

ज़रूरत नहीं थी किसी को उसकी
वो अंतिम साँसे भी सड़क पर ले रहा था__

सब जी रहे थे वो मर रहा था__
वो सड़क पर जन्मा सड़क पर ही चल बसा__

किसी की आँख में आँसू न थे..इंसां था
जानवर की तरह मर गया__

फिर एक सड़क थी
फिर एक दर्द का अंत हो गया__

अंतिमसंस्कार गर्द में ही
कचरेवाले ने कचरे में ही कर दिया___

-PRAGYA-

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3 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - September 10, 2019, 7:16 pm

    मर्म स्पर्शी रचना

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 10, 2019, 9:23 pm

    वाह बहुत सुंदर

  3. nitu kandera - October 12, 2019, 9:50 am

    Nice

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