शमा और लौ

शमा और लौ
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नवयोवना शमा और चमकती लौ
एक साथ जीवन,लेकिन कहानी दो।
लौ अपनी तेजी बढ़ाती गई,
शमा को हर घड़ी दबाती गई।
साथ तो दिया!
पर हाय री धोखेबाज,
शमा को ,
तिल-तिल जलाती गई।
खुद नवयौवना सी च ह च हा ती रही
जिस्म उसका तमक कर गलाती गई।
आखरी सांस तक साथ तो दिया
लाश के ढेर पर मुस्कुराती रही
ये कैसा याराना!!
ये कैसा अज़ीब सा रिश्ता था!!
हंसते- हंसते कब वो शमा की गोद में समा गई
और सो गई हमेशा के लिए, जान भी ना सकी।

निमिषा सिंघल

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14 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - September 13, 2019, 1:12 pm

    बहुत सुंदर

  2. Rishi RJ - September 13, 2019, 1:31 pm

    Nice

  3. Poonam singh - September 13, 2019, 1:59 pm

    Nice

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 13, 2019, 2:02 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां

  5. ashmita - September 14, 2019, 12:08 am

    Nice

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