शमा और लौ

शमा और लौ
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नवयोवना शमा और चमकती लौ
एक साथ जीवन,लेकिन कहानी दो।
लौ अपनी तेजी बढ़ाती गई,
शमा को हर घड़ी दबाती गई।
साथ तो दिया!
पर हाय री धोखेबाज,
शमा को ,
तिल-तिल जलाती गई।
खुद नवयौवना सी च ह च हा ती रही
जिस्म उसका तमक कर गलाती गई।
आखरी सांस तक साथ तो दिया
लाश के ढेर पर मुस्कुराती रही
ये कैसा याराना!!
ये कैसा अज़ीब सा रिश्ता था!!
हंसते- हंसते कब वो शमा की गोद में समा गई
और सो गई हमेशा के लिए, जान भी ना सकी।

निमिषा सिंघल

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