शायद

मैं उससे प्यार करता हूँ,
पर इजहार से डरता हूँ।
कभी-कभी मैं सोचता हूँ,
मुझसे भी प्यार वो करती होगी शायद।

दौड़कर खिड़की पर आना,
मुझे देख प्यार से मुस्कुराना।
कभी-कभी मैं सोचता हूँ,
मेरे इंतजार में राह वो तकती होगी शायद।

वो मेरी बातें सोचती होगी,
रात आँखों में काटती होगी।
कभी-कभी मैं सोचता हूँ,
इकरारे-मोहब्बत से वो डरती होगी शायद।

देवेश साखरे ‘देव’


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13 Comments

  1. Abhishek kumar - January 2, 2020, 11:25 pm

    Good

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 3, 2020, 7:53 am

    Nice

  3. NIMISHA SINGHAL - January 3, 2020, 9:50 am

    Good

  4. Kanchan Dwivedi - January 3, 2020, 12:49 pm

    Good

  5. PRAGYA SHUKLA - January 9, 2020, 8:07 pm

    सुंदर

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