शायरी (गढवाली हास्य)

हमें तो गंज्यालों से कूटा गया
सुल्याठों में कहां दम था।।

मेरा खुट्टा तो रड़ा वहाॅ
जहाॅ कच्यार कम था।।
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7 Comments

  1. MS Lohaghat - October 21, 2020, 8:54 am

    हा हा हा, गजब शायरी

  2. Pragya Shukla - October 21, 2020, 3:18 pm

    हाहाहा…
    क्या खूब कहा

  3. Satish Pandey - October 21, 2020, 3:50 pm

    हा हा हा
    मेरा खुट्टा तो रड़ा वहाॅ
    जहाॅ कच्यार कम था।।
    कमाल है।

  4. Geeta kumari - October 21, 2020, 4:06 pm

    हंसी तो आ रही है हरीश भाई,पर भाषा समझ नहीं आई।

  5. Praduman Amit - October 21, 2020, 6:22 pm

    बहुत ही सुन्दर।

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