शायरी

कलम भी वही है दावात भी वही है।
दिल में भरे मेरे जज़्बात भी वही है ।।
लिखना चाहूँ मै एक गजल आप पर
पर क्या करे अपनी मुलाकात नहीं है।।


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10 Comments

  1. Geeta kumari - December 1, 2020, 1:54 pm

    बहुत खूब भाई जी

  2. Pragya Shukla - December 1, 2020, 1:55 pm

    जज्बात बयां करने के लिए
    मुलाकात होना जरूरी नहीं है,
    जब दिल से दिल का मिलन है तो कैसी दूरी है???
    भाव की प्रधानता एवं शिल्प भी सराहनीय है

  3. Virendra sen - December 1, 2020, 3:25 pm

    क्या खूब कहा है आपने

  4. Praduman Amit - December 1, 2020, 6:01 pm

    वाह पंडित जी बहुत ही सही फरमाया आपने।

  5. vivek singhal - December 1, 2020, 6:56 pm

    👌👌👏👏👏

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