शिकवों के पुलिंदे….

यादों के पंख फैलाकर
सुनहरी रात है आई
उन्हें भी प्यार है हमसे
सुनने में ये बात है आई
पैर धरती पे ना लगते
उड़ गई आसमां में मैं
जीते जी प्रज्ञा’ देखो
स्वर्ग में भी घूम है आई .
चाँद पर है घटा छाई
गालों पर लट जो लटक आई…
सजती ही रही सजनी
सजन की प्रीत जो पाई
मिलन की आग में देखो
जल गये शिकवों के पुलिंदे,
पीकर नजरों के प्याले
प्रज्ञा बन गई मीराबाई…


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11 Comments

  1. Deepak Singh - November 27, 2020, 1:38 pm

    वाह, बहुत खूब |

  2. Geeta kumari - November 27, 2020, 1:50 pm

    बहुत खूब लाजवाब अभिव्यक्ति

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 27, 2020, 2:27 pm

    बहुत खूब

  4. Praduman Amit - November 27, 2020, 7:07 pm

    वाह ।आप मीराबाई भी बन जाती है।

  5. Virendra sen - November 27, 2020, 8:24 pm

    बहुत सुंदर

  6. Satish Pandey - November 27, 2020, 11:19 pm

    उम्दा अभिव्यक्ति

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