*शिल्पकार*

कवि नहीं शिल्पकार हूँ मैं !
एक ऐसा कवि,
जो कागज पर
अपनी भावनाओं भरी कलम से
शब्दरूपी
नक्काशी करता है..
जिसकी सुंदरता सिर्फ
नेत्रों से दिखाई ही नहीं पड़ती
बल्कि हृदय से महसूस भी होती है…


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8 Comments

  1. Geeta kumari - November 22, 2020, 8:33 pm

    वाह लाजवाब अभिव्यक्ति , कविता और कवि की इस से सुंदर परिभाषा तो हो ही नहीं सकती ।आपकी लेखनी से निकला एक-एक शब्द सत्य की कसौटी पर खरा उतर रहा है । बहुत ख़ूब

    • Pragya Shukla - November 22, 2020, 10:50 pm

      इतनी प्यारी समालोचना के लिए आभार

  2. Satish Pandey - November 22, 2020, 9:24 pm

    वाह बहुत ही लाजवाब

  3. Anu Singla - November 22, 2020, 10:20 pm

    Very beautiful

  4. Rishi Kumar - November 23, 2020, 11:26 am

    Very good

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 25, 2020, 7:58 am

    अतिसुंदर

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