श्री राम

कथा सुनाऊ पुरुषोत्तम श्री राम की
विष्णु रूपी अयोध्या पति नाथ की
त्रेता युग में जनम हुआ
राजा दशरथ के महल में
अयोध्या हुआ पूरा चहल पहल में

सुमित्रा से जनम हुआ लक्ष्मण और शत्रुघ्न का
जनम हुआ कैकेयी पुत्र भरत का
खुशियों की लहर उठी
आये भाई श्री राम के

ग्रंथो का ज्ञान मिला गुरु वशिस्ठ की कृपा से
शास्त्रों का ज्ञान मिला गुरु विश्वामित्र की दया से

आयी घडी खुशियों की
सबका जीवन सफल है हो गया
राम का सीता से मिलन हो गया
विधाता ने इस सुन्दर जोड़ी को है जोड़ दिया
सीता के लिए श्री राम ने शिव धानुष है तोड़ दिया

मंथरा ने शब्द भरे केकयी के कान में
भरत बने युवराज और राम जाये वन में
भरत ने ठुकराई बात
रखी पादुका श्री राम की सिंघासन पे
चौदह साल के लिए चल दिये श्री राम लक्ष्मण और सीता वन में

मर्यादा मन में है पाले
वस्त्र धारी वल्कल वाले
जनकनन्दिनी का संगी।
सेवक जिसका बजरंगी।

था व्यभिचारी, वामाचारी।
वो रावण बड़ा अहंकारी
लाकर उसको पंचवटी।
मन में हर्षाया कपटी

मिथ्यावादी फैलाकर जाल
बुला बैठा लंका में काल
कमल नयन फूटी ज्वाला
महापाप रावण ने कर डाला

दानव बोला अंत में
जो विजय पताका नाम है
वो राम है , वो राम है

इंसा में बसा भगवान है
शत्रु को क्षमादान है
सर्वाधिक दयावान है
मर्यादा की पहचान है
नर नारी का सम्मान है
हिंदुत्व का अभिमान है

हिमांशु के कलम की जुबानी


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4 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - May 20, 2020, 10:48 am

    Nice

  2. Pragya Shukla - May 20, 2020, 12:26 pm

    जय श्री राम

  3. Abhishek kumar - May 20, 2020, 12:46 pm

    Good

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