संदेश

पुराने मित्र मेरे! जिंदगी की,
हर ख़ुशी तुझको मिले,
तेरी खुशियों से निकल
कुछ तार मुझ तक भी
जुड़े हैं, ठण्ड से सिकुड़े हुए से,
बेरहम यादें संजोये,
गाँठ बांधी हो किसी ने
संवेदनाओं के गले में,
सिर्फ सांसें ले रहा कुछ
बोल पाता हो नहीं,
बोलने की भी जहाँ
कुछ आवश्यकता हो नहीं,
बिन कहे बस सांस से
सन्देश कहता जा रहा हो ,
पुराने मित्र मेरे! जिंदगी की,
हर ख़ुशी तुझको मिले।
……………… डा. सतीश चन्द्र पाण्डेय, चम्पावत,
काव्य विशेषता- यह परकीय संवेदना है, पात्र के किसी बहुत पुराने मित्र से जुड़ी संवेदना है।


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4 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 22, 2021, 10:27 am

    अतिसुंदर

  2. Geeta kumari - January 22, 2021, 4:26 pm

    पुराने मित्र की याद में कवि सतीश जी की बहुत सुंदर कविता

  3. Anu Singla - January 22, 2021, 5:18 pm

    बहुत सुन्दर रचना

  4. Devi Kamla - January 22, 2021, 10:48 pm

    वाह वाह

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