सत्य

सत्य!
यों देखो तो
सत्य यहाँ कुछ भी नहीं;
सब छलावा है, मिथ्या है |
जिस साये को मान साथी
हम चलते है यहाँ,
साथ छोड़ देता है वह साया भी
निशा के तम में |
सत्य है केवल इतना
कि इस विवृत्त सृष्टि में
तुम बिलकुल अकेले हो |
साथी आते है
क्षणभर के लिए,
और फिर चले जाते है |
ठहरता कोई नहीं यहाँ
जीवनभर के लिए |

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

जंगे आज़ादी (आजादी की ७०वी वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर राष्ट्र को समर्पित)

वर्ष सैकड़ों बीत गये, आज़ादी हमको मिली नहीं लाखों शहीद कुर्बान हुए, आज़ादी हमको मिली नहीं भारत जननी स्वर्ण भूमि पर, बर्बर अत्याचार हुये माता…

ऐसा क्यों है

चारो दिशाओं में छाया इतना कुहा सा क्यों है यहाँ जर्रे जर्रे में बिखरा इतना धुआँ सा क्यों है शहर के चप्पे चप्पे पर तैनात…

Responses

New Report

Close