सन् 2020

सन् 2020 को विदा करते हैं,
दुःखो को खुद से जुदा करते हैं।
खुशियाँ का खुल के आगमन,
हर इक से चलो वफ़ा करते हैं।

सन् 2020……

वक्त कट गया मुश्किल था जो,
इसे भूल जाने की ख़ता करते हैं।
चलो बोते हैं ज़मी में नए पौधे,
फिर कोशिश कर बड़ा करते हैं।

सन् 2020……

साथ इक दो नहीं हजारों ले गया,
प्रार्थना सब मिल दोबारा करते हैं।
जाने अनजाने में हुई जो गलती,
भुला सब हम गले लगा करते हैं।।

*राही अंजाना*
नव वर्ष मङ्गलमय हो।💐🙏💐


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14 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 1, 2021, 7:50 pm

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति
    दीर्घ काल बाद शब्द सुधा का पान कराया।
    राही जी की कविता ने दिल से वाह वाही कराया।।

  2. Pragya Shukla - January 1, 2021, 8:20 pm

    वाह सर,
    देर आए दुरुस्त आए

  3. Anu Singla - January 1, 2021, 8:50 pm

    बहुत सुन्दर

  4. Geeta kumari - January 1, 2021, 9:22 pm

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, सुन्दर रचना

  5. Suman Kumari - January 1, 2021, 10:36 pm

    बहुत ही सुन्दर

  6. Ashish Kumar Yadav - January 1, 2021, 11:03 pm

    बहुत ही शानदार भाई 🤞🤟👌👌👌

  7. Udit - January 3, 2021, 1:58 pm

    Waah

  8. Shruti - January 3, 2021, 2:00 pm

    Waaah

  9. Udit Prakash - January 3, 2021, 2:01 pm

    Waaaaaah

  10. Naimmohammad m - January 3, 2021, 3:10 pm

    बेहतरीन | 👌👌👌

  11. Satish Pandey - January 4, 2021, 4:09 pm

    उत्तम प्रस्तुति, very nice

  12. Nikhil Agrawal - January 5, 2021, 3:55 pm

    Wow

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