सबसे बढ़कर देश की शान

छोड़ चुके थे, जीवन अपना
जीने की वो आशा मे।
तोड चुके थे, अपना हर सपना
सपनो की वो, आशा मे।
अनेक हुए बलिदान ओर,
कई ने दे दी अपनी जान
लेकिन ठान उन्होंने रखा था कि,
सबसे बढ़कर देश की शान।
न देखा था धर्म उन्होंने,
न ही किया था, जातिवाद
उखाड़ उन्होंने फैका था,
इस भूमि से आतंकवाद।
तब स्वतन्त्र हुआ था, भारत मेरा
पर कुछ लोगो ने इसे फिर बखेरा।
अब तो शहीदो की भांति हसते – हसते दे दूंगा अपनी जान
क्योंकि सबसे बढकर मेरे देश शान।

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

कोरोनवायरस -२०१९” -२

कोरोनवायरस -२०१९” -२ —————————- कोरोनावायरस एक संक्रामक बीमारी है| इसके इलाज की खोज में अभी संपूर्ण देश के वैज्ञानिक खोज में लगे हैं | बीमारी…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

जंगे आज़ादी (आजादी की ७०वी वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर राष्ट्र को समर्पित)

वर्ष सैकड़ों बीत गये, आज़ादी हमको मिली नहीं लाखों शहीद कुर्बान हुए, आज़ादी हमको मिली नहीं भारत जननी स्वर्ण भूमि पर, बर्बर अत्याचार हुये माता…

Responses

New Report

Close