समय

समय भी ना क्या खूब चीज है
कभी बहते समुद्र की रेत की तरह
तो कभी
साइकिल की घूमती पैयों की तरह
समय क्या खूब चीज है
कभी जीवन का अर्थ समझौता है
उसी पैयों की तरह
तो कभी
जीवन से अर्थ चिंता है
उसी रेथ की तरह
समय क्या खूब चीज है

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