सरोवर

दिखे शांत सरोवर का उर,
भीतर हो रही हलचल
रह-रह कर उठती हैं लहरें,
बता रही व्याकुलता प्रतिपल..

*****✍️गीता


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15 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 17, 2020, 5:45 pm

    सुंदर

  2. Praduman Amit - October 17, 2020, 6:54 pm

    Wah

  3. Pragya Shukla - October 17, 2020, 7:07 pm

    Very nice

  4. Satish Pandey - October 17, 2020, 7:10 pm

    वाह, बहुत सुंदर पंक्तियाँ लाजवाब अभिव्यक्ति गीता जी।

    • Geeta kumari - October 18, 2020, 5:29 am

      समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी🙏

  5. Piyush Joshi - October 17, 2020, 9:24 pm

    अतिसुन्दर

  6. Anu Singla - October 17, 2020, 9:49 pm

    NICE

  7. Suman Kumari - October 17, 2020, 10:44 pm

    बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ।
    चन्द शब्दों में अथाह सार छिपा है ।

  8. Devi Kamla - October 18, 2020, 7:33 am

    बहुत खूब

    • Geeta kumari - October 18, 2020, 7:36 am

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका कमला जी🙏

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