सर्दी का मौसम

तुम मुझे ओढ़ लो और मैं तुम्हें ओढ़ लेता हूँ,
सर्दी के मौसम को मैं एक नया मोड़ देता दूँ।

ये लिहाफ ये कम्बल तुम्हें बचा नहीं पाएंगे,
अब देख लो तुम मैं सब तुमपे छोड़ देता हूँ।

सर्द हवाओ का पहरा है दूर तलक कोहरा है,
जो देख न पाये तुम्हे मैं वो नज़र तोड़ देता हूँ।

लकड़ियाँ जलाकर भी माहोल गर्म हुआ नहीं,
एक बार कहदो मैं नर्म हाथों को जोड़ देता हूँ।

ज़रूरत नहीं है कि पुराने बिस्तर निकाले जाएँ,
सहज ये रहेगा मैं जिस्मानी चादर मरोड़ देता हूँ।।

राही अंजाना


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26 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 11, 2019, 3:52 pm

    Nice

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 11, 2019, 4:03 pm

    काबिल- ए-तारीफ़

  3. देवेश साखरे 'देव' - December 11, 2019, 5:24 pm

    वाह

  4. Prince Wahid - December 11, 2019, 8:28 pm

    Very nice

  5. Amod Kumar Ray - December 11, 2019, 9:17 pm

    Good

  6. Aaditya Saini - December 12, 2019, 7:35 am

    Good

  7. Amit Kumar - December 12, 2019, 8:19 pm

    Nice

  8. nitu kandera - December 13, 2019, 7:16 am

    cool

  9. Kandera - December 13, 2019, 7:20 am

    सरदि ह

  10. Kandera Fitness - December 13, 2019, 7:21 am

    वाह

  11. kandera study - December 13, 2019, 7:22 am

    सुंदर

  12. D.K jake gamer - December 13, 2019, 7:23 am

    वाह

  13. राम नरेशपुरवाला - December 13, 2019, 7:27 am

    बढिया ह

  14. Abhishek kumar - December 14, 2019, 5:54 pm

    सुन्दर रचना

  15. Aman Saxena - December 15, 2019, 2:36 pm

    Bahut hi achi ☺ lines

  16. Anil Mishra Prahari - December 19, 2019, 8:19 pm

    बहुत सुन्दर।

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