सर्दी की धूप

सर्दी की धूप बड़ी सुहानी
सेवन कर प्राणी सुखदाई ।
चेतन जीव की क्या कहिये
सुख जड़ जात भी पाई।।
ठण्ड हरे नित जीव जगत के
अमराई नित भोजन पावै।
विनयचंद विटामिन डी से
अश्थि सबल बन जाते।।


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10 Comments

  1. Geeta kumari - December 7, 2020, 5:13 pm

    “विनयचंद विटामिन डी सेअश्थि सबल बन जाते।।”
    विटामिन डी के बारे में बताती हुई कवि विनायचंद शास्त्री जी की बहुत ही सुन्दर रचना । सर्दियों की धूप पर बहुत अच्छी कविता, भाई जी

  2. Suman Kumari - December 7, 2020, 5:59 pm

    बहुत ही सुन्दर

  3. Virendra sen - December 7, 2020, 10:38 pm

    अति सुंदर

  4. Satish Pandey - December 7, 2020, 10:51 pm

    लाजवाब अभिव्यक्ति

  5. Pragya Shukla - December 8, 2020, 12:38 am

    अच्छा एवं सफल लेखन

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