साँझ इतनी मनोहर है

साँझ इतनी मनोहर है
गगन में सितारे हैं
धरा में भी सितारे हैं,
बड़े अद्भुत नजारे हैं,
खड़ा हूँ पर्वत की चोटी में
बने घर की छत पर,
बह रही है हवा ठंडी,
कभी है तेज फिर मंदी।
कटा सा चाँद आया है
मगर है चाँदनी सुन्दर,
बहुत शीतल है बाहर पर
भरा है ताप कुछ अन्दर।

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. साँझ इतनी मनोहर है
    गगन में सितारे हैंकटा सा चाँद आया है
    मगर है चाँदनी सुन्दर,
    बहुत शीतल है बाहर पर
    भरा है ताप कुछ अन्दर।
    साँझ का बहुत ही सुंदर चित्रण प्रस्तुत करती हुई और मन के भावों को व्यक्त करती हुई कवि सतीश जी अद्भुत रचना, लाजवाब लेखन

    1. गीता जी, आपकी लेखनी से समीक्षा पाकर मन अति प्रसन्न हुआ। आपका हार्दिक स्वागत है। जीवन संघर्ष है, कष्टों से उबर कर आई हैं आप। पुनः आपका स्वागत है।

New Report

Close