साथी

वित्त – विभूति कहीं जले
तो, जल ही उस बुझाए
कहीं दिल जले तो क्या किया जाए..
अम्बर से पानी बरसे,
तो , छतरी को लिया जाए
नयनों से पानी बरसे, तो क्या किया जाए
देह में कहीं दर्द हो ,
तो दवा ले ली जाए
वेदना हो तो क्या किया जाए
अच्छा साथी होता है,
दवा सा ही..
अच्छे साथी का साथ मिले गर,
तो दवा ही ना ली जाए..

*****✍️गीता*****

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. अच्छा साथी होता है,
    दवा सा ही..
    अच्छे साथी का साथ मिले गर,
    तो दवा ही ना ली जाए..
    वाह वाह, आदरणीया गीता जी, आपकी लेखनी में अद्भुत साहित्य भरा है। श्रृंगार से परिपूर्ण रचना। साथी के सुरम्य महत्व को उद्घाटित करती अतिसुन्दर कविता।

    1. सुन्दर समीक्षा और सराहना हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏
      आपकी इस प्रेरक टिप्पणी से बहुत उत्साह वर्धन हुआ ।

New Report

Close