साधक ब्रह्मचर्य का योगी कहलाता है ।

साधक ब्रह्मचर्य का योगी कहलाता है ।
वह एक-ना-एक दिन खूद को जान लेता है
हम कामी पुरूष सच में बहुत रोते है
आखिर हम भी अंत में ब्रह्मचर्य ही अपनाते है ।।1।।
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किसी को ब्रह्मचर्य की शिक्षा पहले मिली
किसी को मिली ही नही,
किसी को उम्र सिखाई
तो किसी को धर्म ने बताई ।।2।।
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सच जगत का सार है
तो झूठ कब-तक फन उठायेगा
आखिर सच के प्रवाह से
एक दिन झूठ कूचला जायेगा ।।3।।
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ब्रह्मचर्य ही जिन्दगी है
वीर्यनाश अकाश्मिक मृत्य है
अगर झूठी तुम्हें किसी की उक्ति लगती
तो तुम्हारी अनुभव ही तुम्हें सही राह देगी ।।4।।
विकास कुमार

Published in हिन्दी-उर्दू कविता

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