सावन आया है जबसे

बूंदें टपक रही हैं नभ से
सावन आया है जब से
कोपल फूटी है चाहत की
सावन आया है जब से।
जिनकी राहें देख रहे थे
मेरे नयन उन्हीं ने आकर
पूरा घेर लिया मन तब से
सावन आया है जबसे।
कविता निकल रही है लब से
सावन आया है जब से,
उनसे बढ़ने लगी करीबी
सावन आया है जब से।
सूखे सूखे रहते थे हम
मन मे रहते ही थे कुछ गम
अब तो खुश रहते हैं हम
सावन आया है जब से।

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. मन मे रहते ही थे कुछ गम
    अब तो खुश रहते हैं हम
    सावन आया है जब से।
    _______सावन के आगमन पर चारों ओर हरियाली और ख़ुशी का वातावरण हो जाता है, यही सुन्दर सन्देश देती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही सुन्दर भाव और  सुन्दर शिल्प सहित बहुत ही मधुर कविता

New Report

Close