सिर्फ तुम्हारी

जब तुम आँखों से आस बन के बहते हो

उस वख्त तम्हारी और हो जाती हूँ मैं

लड़खड़ाती गिरती और संभलती हुई

सिर्फ तुम्हारी धुन में नज़र आती हूँ मैं

लोगो की नज़रो में अपनी बेफिक्री में मशगूल सी

और भीतर तुम में मसरूफ खूद को पाती हूँ मैं

वो दूरियां जो रिश्तो को नाकामयाब कर देती हैं

उन दूरियों का एहसान मुझ पे, जो खुद को तुम्हारे और करीब पाती हूँ मैं

सारे रस्मों रिवाज़ो को लांघ कर बंधन जो तुमसे जुड़ा

अब उसी को अपना ज़मीनो आसमाँ मानती हूँ

हुआ है ना होगा अब किसी से इस कदर इश्क हमसे पिया

अब ये गुनाह हो या रहमत खुदा की, इसे अपना गुरूर जानती हूँ मैं

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

नज़र ..

प्रेम  होता  दिलों  से  है फंसती  नज़र , एक तुम्हारी नज़र , एक हमारी नज़र, जब तुम आई नज़र , जब मैं आया नज़र, फिर…

Responses

New Report

Close