सिफ़त माँ के मेरे बड़े साफ़ नज़र आते हैं

सिफ़त माँ के मेरे बड़े साफ़ नज़र आते हैं

सिफ़त माँ के मेरे बड़े साफ़ नज़र आते हैं,
तामील दिलाने को मुझे जब वो खुद को भूल जाती है,

पहनाती है तन पर मेरे जिस पल कपड़े मुझे,
वो सर से खिसकता हुआ अपना पल्लू भूल जाती है,

बेशक मुमकिन ही नहीं एक पल जीना जिस जगह,
वहीं ख़्वाबों की एक लम्बी चादर बिछा के भूल जाती है।।

राही (अंजाना)


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6 Comments

  1. देव कुमार - June 14, 2018, 8:51 pm

    Asm post

  2. Mithilesh Rai - June 15, 2018, 4:44 am

    लाजवाब

  3. देव कुमार - June 18, 2018, 1:33 am

    Welcome

  4. Kanchan Dwivedi - March 8, 2020, 7:30 pm

    Nice

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