सुकूँ मिल रहा है

अब्सार आपके
समुन्दर हैं प्यार के,
सुकूँ मिल रहा है,
आपको निहार के।
प्रातः की बेला है
नई रोशनी है,
आप हो बगल में
और क्या कमी है।
सदा पास रहना
यूँ ही मुस्कुराना,
यही इक्तिजा है
यही कामना है।
अब्सार आपके
समुन्दर हैं प्यार के,
सुकूँ मिल रहा है,
आपको निहार के।

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Responses

  1. वाह वाह, सतीश जी ..उत्साह,उल्लास एवम् श्रृंगार रस से ओत-प्रोत अति सुन्दर काव्य रचना..।
    सरपट दौड़ती लेखनी को मेरा नमस्कार, अभिवादन सर..।

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