सुकूँ मिल रहा है

अब्सार आपके
समुन्दर हैं प्यार के,
सुकूँ मिल रहा है,
आपको निहार के।
प्रातः की बेला है
नई रोशनी है,
आप हो बगल में
और क्या कमी है।
सदा पास रहना
यूँ ही मुस्कुराना,
यही इक्तिजा है
यही कामना है।
अब्सार आपके
समुन्दर हैं प्यार के,
सुकूँ मिल रहा है,
आपको निहार के।


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14 Comments

  1. Devi Kamla - September 17, 2020, 8:43 am

    क्या बात है पांडेय जी, वाह

  2. Piyush Joshi - September 17, 2020, 9:12 am

    बहुत खूब

  3. Geeta kumari - September 17, 2020, 10:09 am

    वाह वाह, सतीश जी ..उत्साह,उल्लास एवम् श्रृंगार रस से ओत-प्रोत अति सुन्दर काव्य रचना..।
    सरपट दौड़ती लेखनी को मेरा नमस्कार, अभिवादन सर..।

    • Satish Pandey - September 17, 2020, 7:14 pm

      आपके द्वारा की गई समीक्षा निश्चय ही उत्साहवर्धक है। आपको सादर नमस्कार, सादर आभार

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 17, 2020, 11:17 am

    बहुत खूब

  5. Pratima chaudhary - September 17, 2020, 12:06 pm

    Very nice lines

  6. Chandra Pandey - September 17, 2020, 12:23 pm

    वाह वाह, बहुत खूब

  7. MS Lohaghat - September 17, 2020, 8:28 pm

    बहुत बढ़िया

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