‘सुकून और बेचैनी’

थकान है मगर दिल को आराम है
आज मन भी बड़ा शान्त है
थोड़ी तसल्ली भी है
तुम्हारे साथ होने की
खुशी भी है
तुम्हारे कंधे पर सिर रखकर
आज घण्टों रोती रही मैं
सिर तो दुःख रहा है
मगर दिल हल्का भी है
तुमसे जी भर कर कह दी हमने
दिल की बातें
सुकून भी है और बेचैनी भी है..

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. सुकून और बैचेनी का फ़र्क समझाती हुई कवियित्री प्रज्ञा जी की बहुत सुन्दर पंक्तियां कथ्य और शिल्प बेहद खूबसूरत है । मन के भावों की बहुत ही खूबसूरत अभिव्यक्ति

New Report

Close