“सैनिक की मोहब्बत”

लिफाफे में बंद करके कुछ शिकायतें
भेजती हूँ उनको तुम्हारे पास
अभिलाषा है
तुम तक पहुंचेंगी मेरी चिट्ठियां और
मेरे मन की बात
सुनवाई होगी या मुह फेर लोगे!
या फिर आ लौटोगे मेरे पास
देशभक्त तो बहुत बड़े हो
क्या हमसे भी है थोड़ा-सा प्यार
अगर मोहब्बत है तो आ जाओ
माँग लो मेरा हाथ,
प्रियतम बन जाओ फिर करो देश की सेवा
खाकी वर्दी के साथ ही कर दो पीले मेरे हाथ।।

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Responses

  1. सैनिक और मुहब्बत के तालमेल में रचित रचना बहुत कुछ कह रही है। अति उत्तम।

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