सोचा था जो वो पुरा हो ना सका

बदलते हालात को देख मैं अपना ना हो सका
आंखों के आंसूओं को मैं अपने पोंछ ना सका
टुटते बिखरते देखता रहा मैं कुछ कर ना सका
सोचा था जो वो मेरा सपना पुरा ना हो सका

बदलते काल‌ चक्र में मैं किसी का ना हो सका
रिस्तें पर दाग लगाकर मैं खुद का ना हो सका
ख्वाहिशों को मैं अपने रूसवा मैं कर ना सका
सोचा था जो वो मेरा सपना पुरा ना हो सका

अरमानों को मैं ढ़ोता रहा उड़ान दे ना सका
अपने अन्दर के इच्छाओं को मैं खो ना सका
आश लगाए बैठा रहा मैं कुछ कर ना सका
सोचा था जो वो मेरा सपना पुरा ना हो सका


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4 Comments

  1. Pragya Shukla - May 21, 2020, 9:36 pm

    Good

  2. Abhishek kumar - May 21, 2020, 9:38 pm

    Nice

  3. Kanchan Dwivedi - May 22, 2020, 8:20 pm

    Good

  4. Dhruv kumar - May 22, 2020, 9:23 pm

    Nyc

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