सोच

चाहोगे जीतना तभी जीत पाओगे
मानोगे अपने हैं तभी अपनाओगे
लोभ और ईर्ष्या के दलदल से
जब तक निकलने की सोच ना होगी
मन के रावण को तुम कैसे जला पाओगे।
वीरेंद्र सेन प्रयागराज


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

5 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 21, 2020, 8:55 pm

    बहुत खूब

  2. Virendra sen - December 21, 2020, 9:02 pm

    धन्यवाद

  3. Geeta kumari - December 21, 2020, 9:04 pm

    बहुत ख़ूब

  4. Pragya Shukla - December 22, 2020, 12:11 am

    बहुत खूबसूरत पंक्तियां एवं भाव

  5. Sandeep Kala - December 23, 2020, 10:09 pm

    बहुत ही सुंदर

Leave a Reply