सोना बाबू

हास्य कविता,सोना बाबू
————————-
रात रात जग के हम
पढ़ाई करते थे|
मेरे पड़ोसी-
फोन पकड़ के चुमा करते थे|

आया समय जब पेपर का,
वो रोया करते थे|
सोना बाबू फेल हुए,
बाबू लड़की से-
कोचिंग करते थे|

रात रात जागकर,
वो उपदेश देते थे,
चटनी खा के जीवन गुजरे,
लाखों में वह बात करते थे|

बड़े घरे के बिगड़े बच्चे,
पैसा खूब उड़ाते हैं|
खैनी गुटखा सिगरेट पीते-
रोज सिनेमा रूम पे आके पार्टी करते हैं|

मजदूर किसान के बच्चे तुम,
इनकी नकल क्यों करते हो,
इनके घर तो धन का खजाना,
इनके संग क्यों रहते हो|

करो पढ़ाई मन से यारों ,
या घर आकर बैठो तुम,
बन जा काबिल दुआ है मेरी,
ले छोरी फिर बैठो तुम|

मात पिता और –
कुल का गौरव बन जाओ,
इतिहास रचो और बनो उदाहरण,
ऐसा जीते जी कुछ कर जाओ|
✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍
——ऋषि कुमार “प्रभाकर”——–

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

जंगे आज़ादी (आजादी की ७०वी वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर राष्ट्र को समर्पित)

वर्ष सैकड़ों बीत गये, आज़ादी हमको मिली नहीं लाखों शहीद कुर्बान हुए, आज़ादी हमको मिली नहीं भारत जननी स्वर्ण भूमि पर, बर्बर अत्याचार हुये माता…

Responses

  1. सोना बाबू को तो फेल होना ही था । बहुत हंसी आई ।बाद में सुन्दर संदेश देती हुई सुंदर रचना ।

New Report

Close