सौगात माँगता है

मेरी जान तुम्हारे जान का सौगात माँगता है।
ये जान लिया, जब जान मेरी ,
ले जान हथेली दिन-रात माँगता है। ।
लाँघ नफ़रत की दरिया मुश्कत से
इश्क का एक सरोवर आबाद माँगता है।
बीत जाएगी ये रात काली
ऐ ‘विनयचंद ‘ जुगनू -सी औकात माँगता है।।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

6 Comments

  1. Satish Pandey - December 2, 2020, 5:31 pm

    बहुत खूब, शास्त्री जी, वाह वाह

  2. Pragya Shukla - December 2, 2020, 9:51 pm

    बहुत लाजवाब

  3. Piyush Joshi - December 3, 2020, 7:50 am

    बहुत अच्छी कविता

Leave a Reply