स्नेह की संजीवनी

जब हर ओर निराशा हो,
आशा की किरण दिखा देना।
जब राहों में हो घोर निशा,
दीपक बन कोई राह दिखा देना।
कोई साथ दे ना दे,
तुम अपना हाथ बढ़ा देना।
दर्द में जब कोई तड़प रहा हो,
स्नेह की संजीवनी पिला देना।
बनकर पथ प्रदर्शक किसी का,
उसके जीवन में उल्लास जगा देना।।
_____✍️गीता

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Responses

  1. जब हर ओर निराशा हो,
    आशा की किरण दिखा देना।
    जब राहों में हो घोर निशा,
    दीपक बन कोई राह दिखा देना।
    —— कवि गीता जी की एक एक पंक्ति बहुत लाजवाब है। कविता में मौलिकता है। आदर्श है। कम शब्दों में बड़ी बात कही गयी है।

    1. कविता की इतनी सुंदर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।आपकी लेखनी से निकली इस प्रेरक समीक्षा हेतु तहे दिल से शुक्रिया

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